Best Life Changing 100 Stories In Hindi
एक बार एक आदमी ऊपर गया वहां पे उसने देखा कि, बहुत सी कारों के साथ विदेशी दौरे की टिकट थी, सोने चांदी के सिक्के थे |
फल फ्रूट थे, अच्छी ड्रेसेस थी, जूते थे, हार और नेकलेस थे |
जब उस आदमी ने पूछा, तो बताया गया, कि जब आप निचे सपने देखते हैं, तो वो सब चीजें ऊपर बनना शुरू हो जाती हैं |
लेकिन जब उन सपनो को पूरे नहीं करते या दूसरे काम करने लगते हैं | इसलिए ये सभी चीजें यहीं ऊपर स्वर्ग में ही रह गई हैं |
और निचे जो सपने देखते है कोई सा भी काम करते है और अधिकतर काम पुरे नही करते है और बीच में ही काम अधूरा छोड़ देते है उनके पास ये सभी चीजें नहीं जा पाई है !
एक ट्रेनर ट्रेनिंग देने गया, उसने पूछा, आपको पता है मैं क्या बोलने वाला हूं ? सबने बोला नहीं ,तो ट्रेनर ने बोला जब आपको पता ही नहीं है कि, मैं क्या बोलने वाला हूं | तो फिर मैं नहीं बोलूंगा, और वो वापस चला गया |
दूसरी बार ट्रेनर आया तो, उसने फिर पूछा आपको पता है | मैं क्या बोलने वाला हूं,सब ने बोला हाँ, तो जब आप को पता है | मैं क्या बोलने वाला हूं, तो मैं क्यों बोलूं ? और वो वापस चला गया |
जब ट्रेनर तीसरी बार आया और उसने पूछा, क्या आपको पता है ? मैं क्या बोलने वाला हूं | आधे लोगों ने बोला ‘हाँ ‘और आधे लोगों ने बोला ‘नहीं ‘ तो ट्रेनर ने बोला | जिसको पता है, वो उनको बता दो जिनको पता नही है | और ये बोलकर ट्रेनर वापस चला गया !
एक बाप और बेटी नदी पार कर रहे थे | बेटी ने बाप का हाथ पकड़ रखा था | जैसे ही पानी में उतरे, तो बेटी ने कहा, पिता जी आप मेरा हाथ पकड़ लीजिये तो पिता ने कहा, बात तो एक ही है !
पर बेटी ने कहा, कि मैंने आप का हाथ पकड़ रखा है | पर तेज बहाव में हाथ छूट सकता है, पर अगर आप हाथ पकड़े रखेंगे, तो बहाव कितना भी तेज हो, आप मेरा हाथ नहीं छोड़ेंगे |
हाथ पकड़ना नहीं है, पकड़ वाना है नेटवर्क मार्केटिंग में !
रात हो गई थी। गुरु जी ने चेले से कहा कि ये बल्ब बंद कर दे, आंखो में चुभ रहा है। तो शिष्य बोला आंखें बंद कर लो, बल्ब अपने आप बंद हो जाएगा । गुरुजी ने देखा चेला बहुत ही कामचोर हो गया है ।
फिर गुरुजी बोले, जा बहार देख कर आ, कि बारिश हो रही है कि नहीं । चेला बोला अभी ये बिल्ली बहार से आई है हाथ फेर कर देख लो गिली है, तो बारिश हो रही है और, बिल्ली सूखी है तो बारिश नहीं हो रही है ।
गुरु जी का दिमाग खराब हो गया, उन्होने चेले से कहा, कि चल दरवाजा बंद कर, बाहर से हवा आ रही है । तो चेला बोला गुरुजी दो काम मैंने कर दिए हैं । अब एक काम आप भी कर लो ।
एक आदमी को पीछे से आवाज लगाई कि मोहन तेरी बेटी मर गई है तो उसने तीसरी मंजिल से तुरंत छलांग लगा दी,
दूसरी मंजील तक आया तो याद आया कि उसकी कोई बेटी नहीं है,
पहली मंजिल तक आया तो और याद आया कि उसकी तो शादी भी नहीं थी और जैसे ही गिरने वाला था तो फिर याद आया कि उसका नाम मोहन नहीं था ।
कंजूस ने सेठ से कहा कि, मुझे 1 ट्रुथ ब्रश दे दो | मेरे ब्रश का 1 बाल टूट गया, तो सेठ बोला 1 बाल ही तो टूटा है, क्यों पैसे बिगाड़ रहे हो ?
तो कंजूस ने बोला,अरे वो ट्रुथ ब्रश का आखरी बाल था ।
एक ज्ञानी था ! उसको नदी पार करनी थी, वो नाव में बैठा और नाव चल रही थी, तो ज्ञानी ने नाव चलाने वाले से पूछा, तुमने कुतुब मीनार देखी है ?
नाव चलाने वाले की स्थिति खराब थी, वो मेहनत करके अपना घर चला रहा था ! उसने उत्तर दिया नहीं देखी, तो ज्ञानी बोला कि तुम्हारी चार आने जिंदगी खराब है !
फिर से ज्ञानी ने पूछा तुमने लाल किला देखा ? तो नाव चलाने वाले ने कहा नहीं देखा ! तो फिर ज्ञानी बोला तुम्हारी आठ आने जिंदगी खराब है !
और उसने फिर से पूछा तुमने ताज महल देखा ? नाव चलाने वाले ने कहा नहीं देखा ! ज्ञानी ने कहा तुम्हारी बार आने जिंदगी खराब है,
तभी नदी मे तूफ़ान आने लगा ! तो नाव चलाने वाले ने पूछा, तुम्हें तेरना आता है ? ज्ञानी बोला नहीं, तो नाव चलाने वाले ने कहा ! तुम्हारी सोलह आने जिंदगी खराब है !
एक गांव था जिसमें सालो से बिजली नहीं थी | जहां पे एक आदमी बाजार से दिया ले आया एमएलएम जैसा , और जब शाम हुई तो उसने दिया जला दिया तो, लोगो ने देखा कि कल तक तो सब घरों में अंधेरा ही अंधेरा था |
आज उसके घर में ये दिया कैसे जल रहा है | तो गांव वालो के पास दो रास्ते थे एक तो वे बाजार जा कर सभी दिये लेकर जलाये और दूसरा रास्ता वो था ,
कि जिसका दीया जल रहा है उसके दिये को बुझा दे | बताओ लोगो ने कौन सा रास्ता चुना होगा
एक बार पप्पू नकल करने के लिए समान लेकर परीक्षा देने गया, दुर्भाग्य से उस दिन ऐसी मैडम आई थी। जो पूरी कक्षा में घूम रही थी | ताकि कोई भी नकल नहीं कर पाये ।
लगभग आधा घंटा हो गया | किसी छात्र को समझ में नहीं आ रहा था कि, नकल कैसे करे ? फ़िर पप्पू उठा और मैडम के कान में ऐसी बात बोली | कि मैडम कुर्सी पर जाकर चुप चाप बैठ गई ।
फिर कुछ छात्रो ने फटाफट नकल करना शुरू कर दिया | वो भी अच्छे से पेपर दे कर बाहर आ गये |
सभी छात्रों ने पप्पू से पूछा कि, तुमने मैडम के कान में ऐसा क्या बोला | की मैडम चुपचाप कुर्सी पर बैठ गयी थी।
पप्पू बोला कि मैंने मैडम के कान में बोला कि, आपकी सलवार पीछे से फटी हुई है सब देख रहे हैं । तो योजना तो पप्पू की भी काम कर गई हैं ।
एक आदमी तीन साल से भगवान के अगर बत्ती लगा रहा था ।
कि मेरी लॉटरी लगा दो भगवान | भगवान पिंडी में से निकले, और उस आदमी के एक जोरदार थप्पड़ मारी ।
और फिर बोले कि पहले लॉटरी का टिकट तो खरीद ले, बिना टिकट के लोटरी कैसे लगेगी ?
एक राजा को दूसरे राजा ने दो बाज गिफ्ट में दिए, दोनों बाज दिखने में एक जैसे ही थे और बिल्कुल स्वस्थ थे, राजा ने उनकी व्यवस्था का जिम्मा एक आदमी को दे दिया ।
कुछ दिन बाद राजा बाज देखने गया तो वहां देखा की एक बाज तो दिन भर उड़ता है परंतु दूसरा बाज दिन भर मे दो तिन बार थोड़ा बहुत उचा उड़ता है और पेड़ की एक डाल पर वापस आकर बैठ जाता है,
जबकी दोनों के खाने पीने की व्यवस्था एक जैसी है, राजा उदास हो गया कि इस दूसरे बाज को भी कैसे करके उड़ना सिखाया जाए राजा ने घोषना की कि जो भी इस दूसरे बाज को उड़ा देगा उसे ढेर सारा इनाम देंगे ।
बहुत सारे लोग आए जिनको पक्षियों की जानकारी थी उन्होंने लाख कोशिश की पर दूसरा बाज थोड़ा बहुत उड़ता और वापस पेड की उसी डाल पर आकर बैठ जाता है ।
एक दिन एक किसान आया उसने बोला कि मैं इस बाज को उड़ा दूंगा तो आदमी ने कहा कि बहुत अच्छा राजा भी यही चाहते है तो जब राजा आया तो दोनो बाज आसमान में उड़ रहे थे ।
राजा उन्हें आसमान में उड़ता देख बहुत खुश हुआ और उसने किसान से पूछा कि तुमने ये कैसे कर दिखाया ।
किसान बोला कि मैंने उस डाल को काट दिया जिस पर वो बाज थोड़ा सा उड़ने के बाद बैठ जाता था, राजा ने किसान को ढेर सारा इनाम दिया, और विदा किया । उड़ने के लिए ये जगह छोड़नी होगी ।
एक बार राजस्थान में गधों का मेला लग रहा था तो एक आदमी जोर जोर से बोल रहा था और अनाउंस कर रहा था मेरे गधे को कोई ना करवा दे तो में उसे 5 हजार रुपये का इनाम दूंगा ।
एक आदमी गया और गधे के कान में कुछ ऐसा बोला की गधा ना मे सर हिलाने लगा ।
मालिक उस आदमी से बोला तुमने उसके कान में एसा क्या बोला की गधा ना मे सिर हिलाने लगा आदमी ने बोला पहले 5k रुपये दो मालिक ने 5k रुपये दिए और फिर से पूछा ।
तो आदमी ने कहा मे नेटवर्क मार्केटिंग करता हु और मैंने गधे से पूछा कि मैं तुम्हें एक बिजनेस प्लान बताउ जिससे तुम्हारी जिंदगी में बदलाव हो जायेगा और इस तरह गधा तुरंत ना में सर हिलाने लगा ।
अबकी बार मालिक बोला कोई मेरे गधे को पहले ना और फिर हा करवा दे तो में उसे 50 हजार हजार रुपये इनाम दूंगा ।
फिर वही नेटवर्कर गया और गधे के दाये कान में बोला तो गधे ने हा मे सिर हिलाया और फिर बाये कान मे बोला तो गधे ने ना मे सिर हिलाया तो मालिक बोला तुमने मेरे गधे को ऐसा क्या बोला की वो पहले हा मे सिर हिलाया और फिर ना मे हिलाया ।
तो वो आदमी बोला पहले 50 हज़ार रुपये दो तो मालिक ने पहले उस आदमी को 50 हज़ार रुपये दिये ।
तो उस आदमी ने मालिक को बताया की मेने उसके दाये कान मे बोला पहचाना क्या गधे ने हा में सर हिलाया, और फिर बाये कान में बोला प्लान दिखाउ क्या गधे ने ना में सर हिलाया । इस तरह नेटवर्कर हा या ना दोनों ऑप्शन मे 50k हज़ार लेकर निकल गया ।
एक हिंदुस्तान का आदमी था जिसने अपना सब कुछ बेच के 2 करोड़ रुपये इकठ्ठा किये थे, फिर उसने रॉबर्ट टी कियोस्की को एक चिट्ठी लिखी थी उस चिट्ठी में हिंदुस्तान के आदमी ने रॉबर्ट टी कियॉस्की से पूछा था ।
मैंने अपने सारी संपति बेच के 2 करोड़ रुपये इकठ्ठा किये थे मुझे 2 करोड़ रुपये का क्या करना चाहिए? रॉबर्ट टी कियोस्की ने हमें चिट्ठी का उत्तर दिया तुम्हें इन पैसों से दुनिया घूमना है ।
उस हिंदुस्तानी आदमी ने चिट्ठी पड़ी उसको शक लगा की रॉबर्ट टी कियोस्की को शायद समझ में नहीं आया कि मैं क्या पूछना चाहता हूं उसने डबल से चिट्ठी लिखी और पूछा की मेने सब कुछ बेच के 2 करोड़ रुपए इकठ्ठा किए हैं अब मुझे इन रुपए से क्या करना है ?
फ़िर रॉबर्ट टी कियोस्की चिट्ठी का जवाब देता हैं कि तुम्हें दुनिया में घूमना है उन पैसों से।
दो बार पूछने पर हिंदुस्तानी आदमी को विश्वास हो गया कि 2 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कैसे करना है फिर वो पूरी दुनिया घुमा और आज वो हिंदुस्तान का आदमी ओयो का मालिक है ।
Life Changing Stories In Hindi से हमारी समय और पैसो के बारे में समझ बढ़ती है।
एक आदमी अंधा था उसने बोर्ड पर लिखा रखा था कि ‘मैं अंधा हूं मेरी मदद करो’ किसी ने भी उसकी मदद नहीं की ।
एक दिन एक सज्जन आए, उन्होने अंधे आदमी से कहा कि मैंने आपके साइन बोर्ड पर कुछ बदलाव कर दिया है। साइन बोर्ड को बदलने के बाद अंधे आदमी के पास पैसे की बारिश होने लगी ।
दो तीन दिन बाद फिर वो सज्जन उस अंधे आदमी के पास से गुजर रहे थे तभी अंधे आदमी ने उन सज्जन से पूछा भाई साहब आपने इस साइन बोर्ड में ऐसा क्या लिखा था कि बहुत सारे पैसे देने लगे ।
तो सज्जन बोले मैंने बस कुछ शब्द बदले थे मैंने उस में लिखा था ‘आज का दिन बेहद खूब सूरत है लेकिन मैं इसे देख नहीं सकता’ ।
टीचर ने बच्चे को 1 सेब दिया, 1 और सेब दिया और फिर, 1 और सेब दिया और पूछा कि, अब तुम्हारे पास कितने सेब है ?
बच्चा बोला 4 सेब है ।
ये ही सवाल टीचर ने 2 बार और पूछा परंतु बच्चे ने जवाब दिया 4 सेब है,
फिर टीचर ने प्रश्न में परिवर्तन किया और पूछा अगर मैं तुम्हें 1 संतरा दू, 1 और संतारा दू और फिर, 1 और संतारा दू । तो अब तुम्हारे पास कितने संतरे हैं ?
बच्चे ने बोला 3 संतरे फिर शिक्षक ने बोला एक ही प्रश्न में अलग अलग उत्तर क्यों है ?
तो बच्चे ने बोला 1 सेब पहले से ही मेरे बैग में है, इसलिए कुल 4 सेब हुए परंतु सिर्फ 3 संतरे ही होते हैं । क्यों कि प्रश्न भी सही था उत्तर भी सही था सिर्फ समझ का फर्क था ।
जब बरसात हो रही हो तो अगर आपके पास छम्मच हो तो वो भर जाएगी, गिलास हो तो वो भर जाएगा बाल्टी हो तो वो भर जाएगी टैंकर बना रखा हो तो वो भर जाएगा और तालाब बना रखा हो तो वो भी भर जाएगा
सवाल बारिश का नहीं है सवाल ये है कि आप भरना क्या चाहते हैं ?
इंग्लैंड के प्रधान मंत्री विंस्टन चर्चिल एक बार पागल खाने गए थे तो वहा उन्होंने ने देखा कि एक पागल पेड़ के नीचे बैठकर चिट्ठी लिख रहा था, उन्होने उस से पूछा कि क्या लिख रहे हो,
तो पागल ने गुस्से से बोला दिख नहीं रहा है चिट्ठी लिख रहा हूं फिर उन्हें बोला कि चिट्ठी में क्या लिख रहे हो और किसको लिख रहे हो,
तो पागल ने बोला अभी से कैसे बता दू क्या लिख रहा हु ?
पहले मैं पूरी चिट्ठी लिखूंगा फिर उसमे मेरा पता लिखूंगा और चिट्ठी भेज दूंगा फिर मेरे पास चिट्ठी आएगी मैं उसे खोलूंगा फिर पडूंगा तभी तो मैं बता पाऊंगा ।
इससे विंस्टन चर्चिल समझ गए कि जो हम करते हैं, वो ही हमारे पास आता है ।
एक सों लोगो की मीटिंग हो रही थी उसमें एक आदमी भी था जो बिल्कुल भी बोलता नहीं था और उसको कुछ भी हंसी भी नहीं आती थी फिर उसको चेक किया तो वो जिंदा था ।
उसको पूछा तो वो बोला कि मुझे कुछ भी इंटरेस्ट नहीं है ।
उसे पूछा कि अगर कोई गाड़ी खराब हो जाए तो सर्विस सेंटर वाले क्या करते हैं ठीक करते हैं ।
फिर खराब हो जाये तो फिर ठीक करते हैं फिर खराब हो जाती हैं तो फिर ठीक करते हैं और बार बार खराब हो तो वापस कंपनी में भेज देते हैं जहां से बन के आई है ।
कोशिश पे कोशिश कर ली और ट्रेनिंग पे ट्रेनिंग दे दी फिर भी कुछ असर नहीं हो रहा है तो बताओ अब क्या करना चाहिए ?
अपनी तुलना किसी से ना करें – आपको अनोखा बनाया है आप सिर्फ अपनी पहचान नहीं रख पा रहे हैं ?
जो काम पानी कर सकता है वो पेट्रोल कभी नहीं कर सकता, जो काम तांबा कर सकता है वो काम सोना नहीं कर सकता जो काम टूथब्रश कर सकता है वो काम जेसीबी नहीं कर सकती ।
तुलना उपलब्धि की खुशी को खत्म कर देती है । तुलना खुशी का चोर है । अपनी कार की तुलना नहीं करना है ।
कोई भी अलग-अलग उम्र में बड़े बिजनेस खड़े करता है । सूरज अपने समय पर उगता है और चाँद अपने समय पर उगता है । हमे आज की तुलना कल से करना है की कितना बेहतर हुआ है ?
संता ने रात में बहार आके आसमान की और इशारा करके बंता से पूछा कि तुम्हें क्या समझ में आता हैं 1 खगोल की दृष्टि से देखो तो ब्रह्माण्ड में लाखो करोड़ आकाश गंगा है
2 गृह और ज्योतिष की दृष्टि से देखो तो लगता है शनि सिंह राशि में है ।
3 समय की दृष्टि से देखो तो रात के 3 बजे हैं ।
4 धर्म की दृष्टि से देखो तो लगता है ईश्वर सर्व शक्तिमान है और इंसान बहुत छोटा है ।
5 मौसम की दृष्टि से देखो तो लगता है कल दिन मे बहुत धूप होगी ।
वेसे बंता तुझे क्या लगता है तो बंता ने कहा मुझे लगता है किसी ने हमारा टेंट चुरा लिया है ।
Life Changing Stories In Hindi से हमारी समय और पैसो के बारे में समझ बढ़ती है।
एक बार राजा के दरबार में एक गरीब आदमी आया राजा ने उस आदमी से कहा कि तुम्हें क्या चाहिए तो उस आदमी ने राजा से कहा कि,
मुझे शतरंज के पहले खाने में चावल का एक दाना, दूसरे में दो दाने, तीसरे में चार दाने, चौथे में आठ दाने ऐसे करके चोसठ खाने तक डबल कर के दे दो ।
राजा ने कहा बस इतने से दाने में समझा था तुम बहुत सारा सोना चांदी जवाहरात ये मांगोगे ।
तभी राजा के मंत्री ने राजा से कहा कि ये बहुत ज्यादा हो जाएगा पर राजा ने मंत्री की बात नहीं मानी और उस आदमी की बात मान ली तो,
5वे खाने पर 16 दाने आये ।
10वे खाने पर 512 दाने आये ।
18वे खाने पर 131,072 दाने आये ।
36वे खाने पर 343,59,738,368 दिन आये ।
50वे खाने पर 56294,99534,21312 दाने आये ।
64वे खाने पर कितने दाने आये ?
दो दोस्त थे उन्होंने अच्छा काम किया तो उनके मालिक ने उनसे पूछा कि तुम पैसे कैसे लेना चाहोगे रोज डबल रुपये 30 दिन तक या एक मुश्त 30,000 रुपये
एक ने एक साथ 30,000 रुपये ले लिए और दूसरे ने
पहले दिन 1 रुपये 14वे दिन 8192 रुपये
दूसरे दिन 2 रुपये 16वे दिन 32768 रुपये
तीसरे दिन 4 रु. 18वे दिन 131072 रु
चौथे दिन 8 रु. 21वे दिन 1048,576 रु
5वे दिन 16 रुपये 28वे दिन 134,217,728 रुपये
7वे दिन 64 रुपये 30वे दिन 536,870,912 रुपये
दो बाप बेटों के पास एक गधा था ।
पहली स्थिति में – बेटा गधे पर बैठा था और बाप पैदल चल रहा था, लोग बोले कि ये कैसा बेटा है बाप को पैदल चला रहा है और खुद आराम से गधे पर बैठा है ।
दूसरी स्थिति में – बाप गधे पर बैठा है और बेटा पैदल चल रहा है, तो लोग बोले देखो तो इस बाप को शर्म नहीं आ रही है कि खुद गधे पर बैठा है और बेटे को पैदल चला रहा है ।
तीसरी स्थिति में – दोनों बाप बेटे गधे को लेकर पैदल पैदल चलने लगे, लोग बोले देखो तो इन दोनों बाप बेटों को, गधा होते हुए भी दोनों पैदल चल रहे हैं ।
चोथी स्थिति में – दोनों बाप और बेटे गधे पर बैठे हुए जा रहे थे तो लोग बोले अरे देखो तो इन दोनों को जरा भी दया नहीं है दोनों ही एक गधे पर जा रहे हैं ।
पांचवी स्थिति जो संभव नहीं है – दोनों बाप बेटे गधे को कंधे पर उठा कर ले जाए तो बोलो लोग क्या कहेंगे कि अरे ये दोनों कितने पागल हैं अरे गधा चल नहीं सकता था क्या जो इसे उठा कर ले जा रहे है ।
एक आदमी पंडितजी के पास गया और बोला कि, मेरे बाये हाथ में खुजली हो रही है तो पंडित जी बोले आज तुम्हारे हाथ से पैसे खर्च होने वाले हैं ।
दूसरे दिन फिर वो आदमी पंडितजी के पास गया और बोला कि पंडितजी मेरे दाएं हाथ में खुजली हो रही है पंडितजी बोले आज तुम्हारे पास पैसे आने वाले है ।
तीसरे दिन वो आदमी आया और बोला कि मेरे बाये पैर मैं खुजली हो रही हूं तो पंडितजी बोले आज तुम्हारे घर मेहमान आने वाले हैं ।
चौथे दिन फिर वो आदमी आया और बोला कि मेरे दाएं पैर मैं खुजली हो रही है तो पंडितजी बोले तुम्हारा विदेश जाने का योग है ।
पांचवे दिन वो आदमी फिर आया और बोला मेरे पेट पर खुजली हो रही है पंडितजी बोले तुम गोली खाओ तुम्हें खुजली की बिमारी है तीन चार परेशानियाँ हो तो चलेगा पर ज्यादा हो तो फिर तुम्हें इसका इलाज करवाना पड़ेगा ।
एक बार एक प्रतियोगिता हो रही थी उसमें एक नदी को पार करना था और जो भी नदी को पार कर लेगा उनको 3, 3 लाख रुपये का इनाम मिलेगा,
लेकिन सभी चिल्ला रहे थे कि बहुत छोड़ी नदी है इसे तो कोई पार नहीं कर सकता है तो कोई बोल रहा है कि आज तक इस नदी को कोई पार नहीं कर सका है और कोई तो ये भी बोल रहा है पहले किसी ने नदी पार करने का प्रयास किया था पर थोड़ी दूर तक जाने के बाद वापस आ गया था ।
इस तरह कोई भी नदी में कूदने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था इतने में किसी ने एक आदमी को नदी में धक्का दे दिया ।
और भिड़ में खड़े लोग चिल्लाने लगे बहुत बढ़िया और आगे बढ़ो, भीड़ आवाज कर रही थी तेज और तेज
इस तरह उस आदमी ने वो नदी पार कर ली, जैसे ही वो आदमी नदी के उस पार पहुंचा बहुत से लोगो ने उसे बधाई दी ।
और उसी समय वहा पर बहुत से पत्रकार भी थे तो इनमें से एक ने उस आदमी से पूछा कि तुमने इस नदी को कैसे पार किया जब कि बहुत सारे लोग तो नदी में कूदने की हिम्मत भी नहीं कर रहे थे तो उस आदमी ने कहा की ये बताओ कि मुझे पीछे से धक्का किसने मारा था ?
एक आदमी था वो अपनी पत्नी को जो भी काम करने को कहता था तो उसकी पत्नी उस काम के विपरीत काम करती थी एक दिन उस आदमी ने उसकी पत्नी को कहा था कि आज दाल बना देना तो पत्नी ने दाल की जगह सब्जी बना दी इस तरह से वो सभी काम उल्टे ही करती थी आदमी परेशान हो गया कि इसको कैसे समझा जाए ।
एक दिन बीवी खबर लेकर आई कि उसकी सभी सहेलियां गंगाजी में इस्नान करने जा रही हैं ।
आदमी ने बीवी को समझाया कि तुम गंगाजी में नहाने मत जाओ तो उसकी पत्नी बोली अब तो मुझे गंगाजी में इस्नान करने जरूर जाना चाहिए, तुमने मुझे मना क्यों किया ?
आदमी ने कहा कि तुम जा तो रही हो पर नदी के बिच में जाकर मत नहाना सिर्फ नदी के किनारे किनारे ही नहाना बीवी बोली नदी के बिच में नहाने का मेरा मन नहीं था पर अब आपने मना किया है तो मैं जरूर नदी के बिच में ही जाकर नहाऊंगी ।
आदमी बोला अगर तुम बिच में नहाओ तो ठीक है पर जिस चेन को पकड़ के नहाओ उसको छोड़ना मत बीवी बोली वैसे तो मैं नहीं छोड़ती पर आप बोल रहे हो तो मैं बिच में भी जाउंगी और जरूर छोड़ूंगी। सारे उल्टे काम कर दिये तो पत्नी का राम नाम हो गया ।
उस आदमी ने पत्नी को गोताखोरो से ढुँढवाया पर वो कही नहीं मिली गोताखोरो ने आकर आदमी से कहा की हमने सब जगह ढूंढ ली वो नहीं मिली ।
उस आदमी ने कहा वो जीवन भर उल्टा ही काम कर रही थी इसलिए मैंने उसे जमुनाजी में ढुंढवाया इसलिए तो नहीं मिल रही है क्या ?
एक बार 1 से 9 तक की संख्या में बहस होने लगी ।
पहले 9 ने कहा कि में सबसे बड़ा हू,
तो 8 ने कहा कि में 7 से बड़ा हू,
7 ने कहा कि में 6 से बड़ा हू,
6 ने कहा की में 5 से बड़ा हू,
5 ने कहा कि में 4 से बड़ा हू,
4 ने कहा कि में 3 से बड़ा हू,
3 ने कहा कि में 2 से बड़ा हू,
2 ने कहा कि में 1 से बड़ा हू,
और 1 और 0 दोनों मिल गए और बोले कि हम तुम सबसे बड़े हैं इसे कहते हैं 1 और 0 मिलकार 10 होते है ।
हम सब अपना समय बेचकर पैसा कमाते हैं और कहा भी गया है समय ही धन है ।
1 महीने के 24000 रुपये कमाते हैं ।
1 दिन के 800 रुपये कमाते हैं
1 घंटे के 100 रुपये कमाते हैं
हम सबको पता नहीं है कि हमारे पास कितना समय है, कोई 30 साल तक जीता है और कोई 38 साल तक और 55 साल तक और कोई 60 साल तक और 80 साल तक और कोई 100 साल तक इसलिए हमें फिक्स पता नहीं है कि हमारे पास कितना समय है ?
औसत हम 40 साल तक काम करते हैं ।
20 साल से 60 साल तक हम काम करते हैं ।
हम रोज 8 घंटे काम करते हैं ।
1 सप्ताह में 48 घंटे काम करते हैं ।
30 दिन में 240 घंटे काम करते हैं ।
12 महीने में 2400 घंटे काम करते हैं ।
1 साल में 2400 घंटे कम करते हैं ।
40 साल में 96000 घंटे कम करते हैं ।
सभी लोगो की लाइफ में 1/3 समय जो कि 96000 घंटे है ये बहुत ही महत्तवपूर्ण समय है ।
अगर हमारे पास 96 लोगो की टीम हो तो ये 40 साल का काम 1000 घंटे में ही हो जाएगा ।
अगर हमारे पास 960 लोगो की टीम हो तो ये 40 साल का काम 100 घंटे में ही हो जाएगा ।
अगर हमारे पास 9600 लोगो की टीम हो तो ये 40 साल का काम 10 घंटे में ही हो जाएगा ।
और अगर हमारे पास 96000 लोगो की टीम है तो ये 40 साल का काम मात्रा 1 घंटे में हो जाएगा ।
इससे हमें समझ आता है कि जैसे हमारी टीम बनेगी, वैसे ही हमारी इनकम भी बढ़ेगी और हम टाइम फ्री हो जायेंगे ।
अगर आप जमीन मे आम बोएंगे तो आम उगेगा,
गेहू बोएंगे तो गेहू उगेगा,
भिंडी बोएंगे तो भिंडी उगेगी, और कुछ नहीं बोएंगे तो क्या उगेगा ? तो भी खरपतवार उगेगा ।
एक राजा ने मूर्तियों का मेला लगवाया ! मेले मे घूमते हुए बहुत मूर्तिया देखी पर 3 ऐसी मूर्तिया देखी एक जैसी जिस पर –
1 पर रेट लगी थी 200 ₹,
2 री पर रेट लगी थी 2000 ₹
और 3 री पर रेट लगी थी 20,000 ₹ |
राजा ने मूर्तिकार से पूछा | इनकी रेट मे इतना अंतर क्यों है ? उसने बताया पहली के कान में छेद करना भूल गया, उसे कुछ भी सुनाई नहीं देता |
दूसरी के कान में छेद कर रहा था तो, जल्दी में दोनों कान में छेद हो गये | तो वो एक कान से सुनती है और दूसरे से निकल जाता है |
इस तरह तीसरी के एक ही कान में छेद है वो सुनती है कान से, सोचती है दिमाग से और काम करती है दिल से !
एक आदमी था जो जब भी घर आता था तो उसकी लुगाई कपडे चेक करती थी कि कहीं बाल तो नहीं ऐसे करते करते 20 साल निकल गए पर उसे कभी 1 बाल भी नहीं मिला तो,
वो उसके पति से बोली कि हा मुझे समझ आ गई तुम्हारा चक्कर किसी गंजी लड़की से है वो जिंदगी भर नेगेटिव रही क्यों कि वो सभी पांचो इन्द्रियों से नेगेटिविटी ले रही थी ।
एक गांव में 6 अंधे आदमी रहते थे एक दिन गांव में एक हाथी आया सभी अंधे लोगों ने कहा कि चलो हाथी को छू कर देखेंगे ।
पहले आदमी ने हाथी की पूछ पकड़ी और कहा की हाथी तो रस्सी जैसा होता है ।
दूसरे आदमी ने हाथी का पैर पकड़ा और कहा की हाथी तो खंबे जैसा होता है ।
तीसरे आदमी ने हाथी की सूंड पकड़ी और कहा की हाथी तो पेड़ के तने जैसा होता है ।
चौथे आदमी ने हाथी का कान पकड़ा और कहा की हाथी तो सुप जैसा होता है ।
पांचवे आदमी ने हाथी के पेट पर हाथ फेरते हुए कहा की हाथी तो दीवार जैसा होता है ।
छटे आदमी ने हाथी के दात पकड़े और कहा की हाथी तो कड़क नली जैसा होता है ।
इस तरह सब एक दूसरे से बहस करने लगे और तभी वहा से एक बुद्धिमान व्यक्ति गुजर रहा था उसने अंधे आदमी से पूछा कि आप सब आपस में क्यों झगड़ा कर रहे हैं ।
सभी अंधे आदमी ने अपनी-अपनी बात उस बुद्धिमान व्यक्ति को बताई फिर उस बुद्धिमान व्यक्ति ने अंधे आदमी को समझा कि आप सभी की बात सही है परंतु आप सभी को हाथी की अधूरी जानकारी हैं ।
मतलब आपको हाथी के एक एक अंग की ही जानकारी है ।
जैसे कि सिक्के के दो पहलू होते हैं पर आपको एक ही पहलू की जानकारी है ।
इसलिए आप सभी की एक एक बात मिलकर हाथी की पूरी जानकारी होती है, कम जानकारी के करण ही आप सभी झगड़े रहे हैं ।
सभी अंधे आदमी ने उस बुद्धिमान व्यक्ति की बात मान ली और वह व्यक्ति अपने रास्ते चला गया इस तरह सभी अंधे आदमी को समझ आ गई और वे सब मिलजुल कर रहने लगे ।
गधा = ग – गलत, धा – धारना
एक बार एक आदमी को बेल नहीं मिला तो वो गधे पर भगवान का छोटा सा मंदिर लेकर गांव में निकल पड़ा गांव के लोगो ने भगवान के दर्शन किये और पूजा की और गधे को फल खिलाये
ऐसा सिलसिला रोज चलने लगा लगभाग एक महीना होने को आया इस तरह गधे की भी पूजा होने लगी और गधे को रोज फल खाने को मिलने लगे
महीने भर में गधे को घमंड आने लगा उसने अपने मालिक को लात मार दी और भगवान के छोटे से मंदिर को भी अपने ऊपर से गिरा दिया दिया फ़िर वो गधा गांव में घुमने निकला
गधा जिसके भी घर के सामने जाता घर वाले उस गधे को डंडे से मार कर भगा देते गधे को समझ में आ गया कि मुझे गलत धारना हो गई थी कि पूजा मेरी नहीं सिस्टम की हो रही थी।
एक कंपनी में एक मशीन खराब हो गई कंपनी का पूरा काम ठप हो गया तीन दिन हो गए रोज कंपनी के इंजीनियर आते हैं उस मशीन को देखते और ठीक करने की कोशिश करते हैं पर किसी से भी मशीन ठीक नहीं हो पाई ।
सभी कर्मचारी काम की पूछ ने लगे फिर कंपनी के मालिक मशीन जहां से ले आए उसे फोन लगाया वो बेंगलुरु से हवाई जहाज से आया ।
दो घंटे तक मशीन को सभी तरफ से देखी और एक छोटी सी हथौड़ी मंगाई और मशीन के एक साइड पे दो बार हथौड़ी मारी और बोला अब मशीन स्टार्ट करो ।
एक कर्मचारी ने मशीन स्टार्ट की तो मशीन अच्छी तरह चलने लगी वो इंजीनियर वापस चला गया ।
और बेंगलुरु से उसने मशीन ठीक करने का बिल फैक्स किया जब कंपनी के मालिक ने बिल देखा तो हक्का बक्का रह गया क्यों की बिल दो लाख रुपये का था मलिक ने सोचा मशीन ठीक करने के लिए इतने रुपए नहीं लग सकते,
उसने इंजीनियर को वापस फैक्स किया और पूछा कि आपने बिल में दो जीरो गलती से अधिक लिख दिए है, इसे सही कर दो तो, इंजीनियर ने दूसरी बार फिर वही दो लाख रुपए का बिल भेजा और नीचे यह भी लिखा है कि दो बार हल्की हल्की हथौड़ी मारने का तो दो सो रुपये ही लगे हैं ।
पर एक लाख निन्यानवे हजार आठ सो रुपाए हथौड़ी कहा मारना है वो जानकारी के लिए चार्ज लगा है।
एक बार एक अंग्रेजी महिला भारत में आई तो उसने जलेबी बनाते हुए देखी और जलेबी खाई उसको जलेबी इतनी अच्छी लगी कि वो यहां से जलेबी बनाने का सामान साथ ले गई।
वहा जब वो जलेबी बना रही थी तो हाथ नहीं हिला रही थी बल्की कमर हिला रही थी, इसलिए जलेबी नहीं बन पाई। काम करते वक्त छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना होता है।
एक आदमी रेलवे स्टेशन पर उतरा और स्टेशन से बाहर निकला और एक टेम्पो वाले से पूछा कि ताज महल देखने जाना है कितने रुपये लगेंगे ?
टेंपो वाले ने कहा कि बीस रुपये लगेंगे उस आदमी ने कहा कि दस रुपये दे दूंगा टेंपो वाले ने कहा दस रुपये में नहीं ले जा सकता हूं
इस तरह टेंपो वाला भी धीरे-धीरे उस आदमी के साथ बात करता हुआ टेंपो चला रहा था थोड़ा दूर चलते चलते उस आदमी ने फिर से टेम्पो वाले से पूछा कि अब ताज महल तक जाने के कितने रुपये लगेंगे ?
टेम्पो वाले ने बोला तीस रुपये लगेंगे उस आदमी ने बोला पहले तो आप बीस रुपये ले रहे थे अब इतने रुपये कैसे हो जायेंगे, जब कि मैं पैदल भी चलकर बहुत आगे आ गया हू टेम्पो वाला बोला ताज महल पहले कम दूर था अब तुम ताज महल से बहुत ज्यादा दूर आ गए हो क्यों कि तुम ताज महल के विपरीत दिशा में चल रहे हो
उस आदमी ने तीस रुपये दिए और फिर टेम्पो में बैठ गया फिर टेम्पो वाले ने उसे ताज महल के पास उतार दिया।
एक आदमी दुकान पर गया वहा उसने देखा की एक चिड़िया का रेट लिखा था बीस रुपये दूसरी चिड़िया का रेट लिखा था दो सो रुपये और तीसरी चिड़िया का रेट लिखा था दो हज़ार रुपये। उस आदमी ने पूछा ये तीसरी चिड़िया का रेट दो हज़ार रुपये क्यो है ?
दुकानदार ने बताया की ये चिड़िया जब बोलोगे की गाना गाओ तो ये गाना गाएगी अगर तुम इसे बोलोगे की मुझे सुबह 6 बजे उठा देना तो ये तुम्हे 6 बजे उठा देगी वो आदमी दो हज़ार वाली चिड़िया ले आया उसने वो दो हज़ार रुपये बहुत हि मुश्किल से इकट्ठे किये थे
रात को उसने चिड़िया से बोला की मुझे सुबह 6 बजे गाना गाकर उठा देना सुबह हुई पर चिड़िया ने उसे नहीं उठाया वो दुकानदार पर गया और बोला की चिड़िया ने तो मुझे 6 बजे नहीं उठाया क्या दिक्कत हुई ?
दुकानदार बोला तुम एक सीढि ले जाओ वो चिड़िया सुबह सीढि पर चढ़ेगी उतरेगी फिर तुहे गाना गाकर उठाएगी उस आदमी ने सीढि भी खरीद ली दुकानदार से और घर ले गया दूसरे दिन भी उसने चिड़िया को कहा था की सुबह 6 बजे गाना गाकर उठा देना परन्तु चिड़िया ने उसे नहीं उठाया
फिर वो दुकानदार पर गया और बोला सीढि ले जाने पर भी उसने ना गाना गया और ना हि मुझे सुबह 6 बजे उठाया दुकानदार बोला एक कटोरा ले जाओ और उस के पास रखना ताकि सुबह 6 बजे चिड़िया सीढि पर चढ़े और कटोरे के चोच मारे और फिर गाना गाकर तुम्हे उठाएगी
उस आदमी ने दुकानदार से कटोरा खरीदा और घर ले गया तीसरे दिन उसने वैसा हि किया जैसा दुकानदार ने उसे बताया था पर चिड़िया ने ना गाना गाया ना उसे उठाया और न ही कटोरे को चोंच मारी
उस आदमी ने उठ कर देखा तो चिड़िया चुपचाप एक जगह पड़ी हुई हलकी हलकी चोच हिला रही थी वो आदमी दुकानदार पर गया और पुरी बात उसको बताई
दुकानदार बोला आज चार दिन हो गये है तुमने चिड़िया को कटोरे में दाना डाला की नहीं
उस आदमी ने बोला की नहीं तुमने मुझे नहीं बताया और ना हीं मेने उसे दाना डाला
दुकानदार बोला चिड़िया भूखे पेट तुम्हे कैसे उठाएगी ? उस आदमी के बात समझ मे आ गई की मेने जो खास काम था वो तो अभी तक किया हि नहीं वो जल्दी जल्दी घर गया तो वहा घर पे देखा तो चिड़िया भूख से मर चुकी थी।
एक बार दक्षिण अफ्रीका मे बारिश नहीं हो रही थी गांव मे एक सिद्ध पुरुष आये हुए थे गांव के लोगो ने कहा हमारे गांव मे बारिश नहीं हो रही है आप कुछ करो ताकि बारिश होने लगे।
सिद्ध पुरुष नाचने लगे पंद्रह बीस मिनट नाचते रहे तो बारिश शुरु हो गई गांव के लोग उनके चरणो मे गिर गये और आशीर्वाद लिया और पूछा की बाबा आपने ये कैसे कर दिया।
बाबा ने बोला की आज तो बारिश जल्दी शुरू हो गई नहीं तो मे बारिश आने तक नाचता चाहे इसके लिये मुझे पंद्रह दिन भी क्यो ना नाचना पड़े।
मेने ऐसे तो नहीं बोल रखा है की मे एक घंटे नाचूंगा और पानी आ हि जायेगा मतलब जब तक सफलता नहीं मिल जाती मे काम करता हि रहूंगा ।
एक छात्र परीक्षा दे रहा था प्रश्न पत्र मे प्रश्न आया की शिवाजी महाराज रायगढ़ के किले पर कैसे पहुचे ? इतिहास का पेपर था इसमे ऐसे हि प्रश्न आते है।
छात्र ने एक और उत्तर कॉपी ली और पहली लाइन मे लिखा की शिवाजी महाराज घोड़े पर सवार हो गये । और उत्तर कॉपी कि आखरी लाइन मे लिखा की शिवाजी महाराज रायगढ़ के किले पर सकुशल पहुंच गये।
उत्तर कॉपी जाँचने वाले सर ने कॉपी देखी की बहुत बड़ा उत्तर लिखा है सर ने पहले पेज पर पढ़ा की शिवाजी महाराज घोड़े पे सवार हो गये है।
दूसरा पेज पढ़ा,तीसरा पेज पढ़ा,चौथा पेज पढ़ा,पांचवा पेज पढ़ा,छठा पेज भी पुरा पेज पढ़ा और सर ने आख़री पेज की लाइन भी पड़ी की शिवाजी महाराज रायगढ़ के किले पर सकुशल पहुंच गये है।
सर ने छात्र का नाम देखा और कहा की बहुत समझदार छात्र है जिसने इतना बड़ा उत्तर लिखा है छात्र ने दोनो लाइनो के बीच मे लिखा तुगडुक तुगडुक,तुगडुक तुगडुक,तुगडुक तुगडुक,तुगडुक तुगडुक,तुगडुक तुगडुक ऐसे हि पहुचे होंगे।
कोई भी लक्ष पर लगातार चलते रहने से जरूर पहुँचता है । हमारे बिजनेस मे तुगडुक तुगडुक की जगह दे प्लान दे प्लान तो ऐसे हि डायमंड बनते है।
कहा जाता है कि एक उदासीन युवक यूनानी दार्शनिक सुकरात के पास गया और बोलने लगा, हे महान सुकरात, में आपके पास ज्ञान के लिए आया हु।
सुकरात उस युवक को समुद्र तक ले गए, उसके साथ पानी में उतरे और तीन सेकंड तक उसका सिर पानी के अंदर डुबाकर रखा! फ़िर सुकरात ने सास लेने के लिए युवक का सिर ऊपर निकाला और पूछा कि अब वह क्या चाहता है।
उस युवक ने पानी की फुहार छोड़े हुए कहा, महान सुकरात ज्ञान! सुकरात ने उसका सिर दोबारा पानी में डुबा दिया, इस बार थोड़ी ज्यादा देर तक! सुकरात बार बार डूबाते निकालते रहे और पूछते रहे, तुम क्या चाहते हो ? अंत में युवक ने जवाब दिया, हवा । में हवा चाहता हूं।
बहुत बढ़िया, सुकरात ने जवाब दिया देखो तुम्हारे भीतर जितनी चाहत हवा की थी, उतनी ही तीव्र चाहत ज्ञान की होगी, तो वह तुम्हे मिल जाएगी।
एक बार बादलो की हड़ताल हो गई, बादलों ने कहा अगले दस साल पानी नहीं बरसायेंगे ! ये बात जब किसानो ने सुनी तो उन्होंने अपने हल वगैरह पैक करके रख दिए, एक किसान अपने नियमानुसार हल चला रहा था ! कुछ बादल थोडा निचे से गुजरे और किसान से बोले क्यों भाई पानी तो हम बरसायेंगे नहीं, फिर क्यों हल चला रहे हो ?
किसान बोला कोई बात नहीं जब बरसेगा तब बरसेगा, लेकिन में हल इसलिए चला रहा हु की में दस साल में कही हल चलाना न भूल जाऊ !
अब बादल भी घबरा गए कि कहीं हम भी बरसना न भूल जाए ! तो वो तुरंत बरसने लगे और उस किसान की मेहनत जीत गई ! जिन्होंने सब पैक करके रख दिए थे वो भी पछताते रह गए ! इसलिए अपने काम में लगे रहे भले ही परिस्थितियां अभी हमारे विपरीत है, लेकिन आने वाला समय नि संदेह हमारे लिए अच्छा होगा !
एक जंगल था ! उसमे हर तरह के जानवर रहते थे ! एक दिन जंगल के राजा का चुनाव हुआ ! जानवरों ने शेर को छोड़कर एक बन्दर को राजा बना दिया ! एक दिन शेर बकरी के बच्चे को उठा के ले गया ! बकरी बन्दर राजा के पास गई और अपने बच्चे को छुड़ाने की मदद मांगी !
बन्दर शेर की गुफा के पास गया और गुफा में बच्चे को देखा, पर अन्दर जाने की हिम्मत नहीं हुई ! बन्दर राजा गुफा के पेड़ो पर उछाल लगाता रहा, कई दिन ऐसे ही उछल कूद में गुजर गए ! तब एक दिन बकरी ने जाकर पूछा ! राजा जी मेरा बच्चा कब लाओगे ? इस पर बन्दर राजा तिलमिलाते हुए बोले, ‘ हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ’ !
एक संत रोज अपने शिष्यों को सत्संग सुनाते थे ! सभी शिष्य इससे खुश थे, लेकिन एक शिष्य चिंतित दिखा ! संत ने उससे इसका कारण पूछा ! शिष्य ने कहा गुरुदेव, आप जो कुछ सत्संग में सुनाते है वह समझ में नहीं आता ! में इसी वजह से चिंतित और दुखी हु !
गुरु ने कहा कोयला ढोने वाली टोकरी में जल भर कर ले आओ ! शिष्य चकित हुआ, आखिर टोकरी में कैसे जल भरेगा ? लेकिन गुरु ने यह आदेश दिया था, इसलिए वह टोकरी में नदी का जल भरा और दौड़ पड़ा लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ ! जल टोकरी से छन कर गिर पड़ा !
उसने टोकरी में जल भर कर कई बार गुरु जी तक दौड़ लगाईं लेकिन टोकरी में जल टिकता ही नहीं था ! तब वह अपने गुरुदेव के पास गया और बोला गुरुदेव टोकरी में पानी लाना संभव नहीं है, कोई फायदा नहीं ! गुरु बोले फायदा है टोकरी में देखो ! शिष्य ने देखा
‘बार बार पानी में कोयले की टोकरी डुबाने से स्वच्छ हो गई है ! उसका कालापन धुल गया है !गुरु ने कहा ठीक जैसे कोयले की टोकरी स्वच्छ हो गई और तुम्हे पता भी नहीं चला, उसी तरह सत्संग बार बार सुनने से खूब फायदा होता है ! भले ही अभी तुम्हारे समझ में नहीं आ रहा है ! लेकिन तुम इसका फायदा बाद में महसूस करोगे !
एक बार एक कुत्ते और गधे के बीच शर्त लगी कि जो जल्दी से जल्दी दौड़ते हुए दो गाँव से आगे रखे एक सिंहासन पर बैठेगा, वही उस सिंहासन का अधिकारी माना जायेगा, और राज करेगा !
जैसा कि निश्चित हुआ था, दौड़ शुरू हुई ! कुत्ते को पूरा विश्वास था की में ही जीतूंगा ! क्योंकि जाहिर है इस गधे से तो मैं तेज ही दौडूंगा, पर आगे किस्मत में क्या लिखा है !
ये कुत्ते को मालूम ही नहीं था ! शर्त शुरू हुई, कुत्ता तेजी से दौड़ने लगा ! पर थोडा ही आगे गया न गया था की अगली गली के कुत्तों ने उसे लपकना, नोचना, भौंकना शुरू कर दिया और ऐसा हर गली हर चौराहे पर होता रहा !
जैसे तैसे कुत्ता हाफ्ते हाफ्ते सिंहासन के पास पंहुचा, तो क्या देखता है कि गधा पहले से ही सिंहासन पर विराजमान है !
तो क्या गधा उसके पहले ही वहाँ पहुँच चूका था ? और शर्त जीत कर वह राजा बन चूका था और ये देखकर निराश हो चूका कुत्ता बोल पड़ा अगर मेरे ही लोगो ने मुझे आज पीछे न खींचा होता तो आज ये गधा इस सिंहासन पर न बैठा होता !
एक रात एक पिता पूरा दिन ऑफिस में काम करने के बाद घर पंहुचा और थोड़ा आराम करने के मकसद से लेटकर अखबार पढ़ने लगा ! उसका बेटा, जो उसके साथ खेलना चाहता था, उसे लगातार तंग कर रहा था ! अंत में परेशान होकर पिता ने अख़बार में से एक ग्लोब का चित्र काटकर उसके सौ छोटे छोटे टुकड़े कर दिए ! लो बेटा जाओ और इसको फिर से जोड़ने की कोशिश करो ! उसने इस आशा के साथ कहा की जब तक वह अख़बार पढ़ना समाप्त करेगा, लड़का इस काम में व्यस्त रहेगा !
जब उसका बेटा एक मिनट में ही ग्लोब ठीक से जोड़कर ले आया, तो उसके पिता को बहुत आश्चर्य हुआ ! उसने पूछा की उसने यह अद्भुत काम कैसे किया ? इस पर पुत्र ने मृदु मुस्कान के साथ उत्तर दिया, पिता जी, ग्लोब के पीछे एक आदमी का चित्र था, और जैसे ही मेने आदमी का चित्र जोड़ा, ग्लोब का चित्र ठीक हो गया !
एक बार यदि तुम अपने आपको जोड़ लो, तो तुम्हारी दुनिया बिलकुल ठीक हो जाएगी !
एक बार की बात है एक कमजोर वृद्ध महिला का पति मर गया ! इसलिए वह अपने पुत्र उसकी पत्नी और पुत्री के साथ रहने के लिए चली गयी ! प्रतिदिन उस महिला की दृष्टि और सुनने की शक्ति कमजोर होती चली गयी, कभी कभी उसके हाथ इतने अधिक काँपते थे कि उसकी प्लेट से मटर के दाने लुढ़ककर निचे गिर जाते थे और कप से सुप गिर जाता था !
उसका पुत्र और उसकी पत्नी इस गंदगी से बहुत परेशान हो जाते थे ! एक दिन उन्होंने कहा की बस अब बहुत हो चूका ! इसलिए एक दिन उन्होंने उस वृद्ध महिला के लिए एक छोटी मेज़ झाड़ू रखने की निकट लगा दी ! उसको वही बैठकर अकेले ही हर बार खाना खिलाया जाने लगे ! वह भोजन के समय अश्रुपूरित नेत्रों से उनकी और अपने कमरे से देखा करती, लेकिन खाते समय उसके चम्मच या काँटा गिराने पर उसे बुरा भला कहने के सिवाय वे उससे कोई बात नहीं करते थे !
एक शाम रात के भोजन से जरा देर पहले उनकी छोटी बेटी घर बनाने के ब्लॉक्स से खेल रही थी ! उसके पिता ने प्यार से पूछा, तुम क्या बना रही हो ?
में आपके और मम्मी के लिए एक छोटी मेज़ बना रही हु – उसने कहा, अतः किसी दिन जब में बड़ी हो जाऊंगी तब आप दोनों कोने में बैठकर खाना खा सकोगे ! पिता और माता दोनों की बोलती बंद हो गई काफी देर चुप्पी रही, फिर वे दोनों रोने लगे ! अपने कृत्यों की प्रकृति और दुःख जो उन्होंने दिया था, उसे वे उसी क्षण समझ गए !
उसी रात को वे उस वृद्ध महिला को अपनी बड़ी खाने की मेज़ पर, जहा उसका सही स्थान था, वापस ले गए और फिर उस दिन से हमेशा उस वृद्ध महिला ने उनके साथ ही भोजन किया और जब कभी भोजन का छोटा हिस्सा मेज़ पर गिर जाता था या कांटा छिटककर फर्श पर जा गिरता, तो किसी को इससे कोई परेशानी नहीं होती थी !
एक गांव में दो दोस्त थे एक नाम था रमेश और दूसरे का नाम था सुरेश, दोनों ही जीवन में सफल होना चाहते थे, ड्रीमर थे और आगे बढ़ना चाहते थे | दोनों ने सोचा की कोई बिज़नेस शुरू करते है | दोनों ने सोचा की हम दूध का बिज़नेस शुरू करेंगे |
हम एक भैंस खरीदेंगे उसका दूध बेचेंगे और पैसे कमाएंगे | भैंस बच्चे को जन्म देगी इस तरह भेंसो की संख्या बढ़ती जाएगी | एक समय ऐसा आएगा जब हमारे पास बहुत सारी भेंसे हो जाएगी और हमारा बिज़नेस बढ़ता ही जायेगा, हम बहुत आमिर हो जायेंगे |
पर दोनों के पास पैसे नहीं थे, और दोनों शादीशुदा थे, घर जाते है बीवी से पूछते है की ये बिज़नेस कांसेप्ट है जिससे हम आमिर बन सकते है | हमारे पास भैंस खरीदने के पैसे नहीं है तो तुम हमें मंगलसूत्र दो इसको बेचकर भैंस ख़रीदेंगे और बिज़नेस स्टार्ट करेंगे और बिज़नेस से हम तुम्हे इससे भी बड़ा मंगलसूत्र खरीदकर देंगे | दोनों इस आईडिया पर एग्री हुए |
दोनों ने सोचा की एक ही गांव में बिज़नेस करेंगे तो कॉम्पीटीशन हो जाएगी इसलिए दोनों ने एक दुसरो से सौ सौ किलोमीटर दूर जाकर बिज़नेस शुरू करेंगे और पांच साल बाद दोनों एक दूसरे से मिलेंगे | और अपनी कामयाबी की कहानी एक दूसरे को सुनाएंगे |
दोनों पांच साल बाद एक दूसरे से मिले | रमेश अच्छी ड्रेस पहन के एक गाडी से आया और सुरेश सादे कपडे में एक साइकिल लेकर आया | रमेश ने पूछा अरे भाई ये क्या हुआ तुम्हारी ऐसी हालत क्यों है ? इस पर सुरेश बोला ये सब छोडो ये बताओ तुम इतने आमिर कैसे हो गए क्या तुम्हे कोई जादू की छड़ी मिल गयी |
तब रमेश बताता है कोई जादू की छड़ी नहीं मिली ये वही आईडिया है जो हमने आज से ठीक पांच साल पहले डिसाइड किया था | में घर गया मेने बीवी से बोला की तुम मंगलसूत्र देदो उसको बेचकर हम एक भैंस खरीदेंगे इससे मेरे पास एक भैंस हुई फिर दो तीन और फिर दस भैंस हुई आज मेरे पास पांच सो भेंसे है और में बहुत बड़ा आमिर आदमी हु | लेकिन तुम्हारी हालत ऐसे कैसी है ?
तब सुरेश कहता है में भी घर गया बीवी को बोला की मंगलसूत्र बेचते है भैंस खरीदते है एक में से दो होगी दो की चार होगी और ऐसे हमारे पास हज़ारो भेंसे हो जाएगी | मेरी वाइफ एग्री हुई पर उसने मुझसे एक सवाल पूछा हम मंगलसूत्र बेचने के बाद एक भैंस खरीदते है और भैंस मर गई तो ? भैंस मर गई तो, यह बात मेरे दिमाग में बैठ गई और मेने उस आईडिया को वही बंद कर दिया और पांच साल बाद आज भी में ऐसा ही गरीब हु।
एक बार शेर के साथ सभी जानवरो द्वारा किये गए समझौते के अनुसार प्रतिदिन बारी बारी से वन का एक जानवर शेर के भोजन के लिए जाता था | एक दिन जब एक खरगोश की बारी आई तो वह जान बूझकर देर से गया और देरी का कारण बताते हुए शेर से कहा की उसे दूसरा शेर अपना भोजन बनाना चाहता था |
वह उसे सूचित करके लौटने की प्रतिज्ञा करके आया है | शेर ने जब खरगोश को दूसरा शेर दिखाने को कहा तो उसने कुए में उसी शेर की परछाई दिखा दी | मुर्ख शेर ने अपने शत्रु को पछाड़ने के लिए कुए में छलांग लगा दी और वही मर गया |
इस कहानी का अभिप्राय यह है कि बुद्धिमान ही बल का सही उपयोग कर सकता है, बुद्धिहीन का बल भी उसके काम नहीं आता |
चाणक्य नीति। – आचार्य चाणक्य
दो मेंढक एक ही पोखर में रहते थे। पोखर गर्मी के कारण सुख गया था, इसलिए वे उसमे से निकलकर दूसरे ठिकाने की तलाश में निकल पड़े। वे एक गहरे कुए के पास से गुजरे, जहा जहाँ काफ़ी पानी था। यह देखकर एक मेंढक दूसरे से बोला ” हम कूदकर इस कुए में रहने लगते है। इसमें हमें आश्रय और भोजन मिलेगा। “
दूसरे ने सावधानी से जवाब दिया ” लेकिन मान लो इसका पानी सुख गया, तो क्या होगा ? हम इतने गहरे कुए से बाहर कैसे निकल पाएंगे ? ” परिणामों के बारे में सोचे बिना कुछ भी ना करे।
https://dividedlegendcompany.in/books/
45. 48 Laws of power ( शक्ति के 48 नियम ) -by Robert Greene !!!
एक रात सोते समय बेटे ने पिता से पूछा, “पापा, आप एक घंटा काम करके कितने रुपये कमाते हो ?” “छोटे से बच्चे का सवाल सुनकर पिता ने हैरानी से पूछा, क्यों पूछ रहा है ?” ” पापा प्लीज बताओ ना ” बेटे ने कहा
” महीने के बिस यानी .. . ।” पिता ने गणना करते हुए कहा, ” लगभग सो रुपये कमा लेता हु, क्यों ?”
“पापा, मुझे पचास रुपये दीजिये ना, प्लीज …।” बेटे ने मासूमियत के साथ याचना की। ” लगता है आज तेरा दिमाग ख़राब हो गया है। ” पापा ने डाँटकर कहा, “उलटे सीधे सवाल पूछता है, क्या करेगा पचास रुपये का ? जा, जाकर सो जा। “
बेटा रुआँसा होकर सो गया, लेकिन पिता की नींद उड़ गई। सारी रात सोने के बाद भी पिता को इस पहेली का हल नहीं मिला की बेटे ने यह पूछा क्यों और रुपये मांगे क्यों ? आखिर सुबह होते ही बेटे को जगाकर पिता ने पचास का नोट उसे दिया और कारण पूछा।
“पापा मै मिनट में आया … ।” कहकर बेटा चला गया, और दौड़कर अपनी गुल्लक ले आया। गुल्लक को तोड़कर उसने अपने जमा किये हुए पैसे जोड़े, जो कि पचास रूपये थे। उसमे पिता के दिए हुए नोट को मिलाकर अपने नन्हे हाथो से बेटे ने सो रुपये अपने पिता की हथेली पर रखकर कहा, “पापा ये सौ रुपये है। आज अपना घंटा मेरे साथ बिताइए ना, प्लीज। “
धन कमाने के चक्कर में हम कही इतने मशगूल तो नहीं जो गए कि हम अपने समय को बेचते समय यह भी भूल गए है, कि साथ में हमने अपने बच्चो का बचपन और परिवार की खुशिया भी बेच दी है।
नए ज़माने का बिजनेस, नेटवर्क मार्केटिंग। – शंकर मंशानी
गुरु नानक देव गांव के पास से चले जा रहे थे कि तभी कुछ भक्तो ने आकर उनकी चरण वंदना की। गुरु नानक देव बिना प्रसाद दिए किसी को लौटाया नहीं करते थे, लेकिन उस दिन, उनके पास प्रसाद नहीं था। तब उन्होंने अपने साथ चलने वाले अनुयायियों को आदेश दिया कि वो जाकर पास में ही बाबुल के पेड़ को हिलाये और उस पेड़ से गिरने वाले प्रसाद को लाकर दे, ताकि प्रसाद बाँटा जा सके।
उनके बेटे श्रीचंद सहित सभी शिष्य उनके इस अजीब से आदेश को सुनकर वही ठिठककर खड़े रह गए। लेकिन भाई लहाणो ने आदेश का पालन करते हुए पेड़ को हिलाया और सचमुच उससे प्रसाद बरसने लगा, जिसे बाँट दिया गया। बाद में किसी ने सवाल किया, ” लहाणो, आपने कैसे जान लिया कि पेड़ को हिलाने से प्रसाद बरसेगा ?”
भाई लहाणो ने जवाब दिया, “मुझे नहीं मालूम। गुरूजी ने आदेश दिया था कि पेड़ को हिलाओ, मुझे उसके परिणाम से कोई मतलब नहीं था। मैंने तो बस उनके आदेश का पालन किया, अपना कार्य किया। अब प्रसाद बरसाना तो गुरूजी के हाथ में था, उनकी महिमा वे ही जाने… । “
इतिहास गवाह है कि गुरु नानक देव की गद्दी पर आगे चलकर उनके बेटे नहीं, बल्कि गुरु अंगद देव ( परम शिष्य भाई लहाणो ) विराजमान हुए।
समर्पण का अर्थ यही है कि हम परिणाम की चिंता किये बिना अपने गुरु के आदेश का पालन करे, क्योंकि अपेक्षित परिणाम की चिंता गुरु स्वयं करेगा।
नए ज़माने का बिजनेस, नेटवर्क मार्केटिंग। – शंकर मंशानी
जंगल में कुत्ते को भूख से मरता देख उसे दया आ गई और उसने अपनी पोटली से रोटी निकालकर उसे खिलाई। कुत्ते का भेष धारण करने वाले वन देवता ने खुश होकर उसे कामनापूर्ति का वरदान दिया।
वरदान की जांच के लिए उसने पहले स्वादिष्ट भोजन की कामना की और छपन भोग से सजी थालिया प्रकट हो गई। छककर भोजनं करने के बाद उसे जब सुस्ती आने लगी, तो उसने नरम बिस्तर की कामना की और आरामदायक बिस्तर बिछ गया।
बिस्तर पर लेटकर उसे विचार आया की इस जंगल में अगर उसे नींद आ जाएगी, तो शेर आकर उसे खा जायेगा।
वरदान सच निकला। जल्दी ही उसे गहरी नींद आ गई। शेर आया उसे खा गया… । जीवन का रहस्य यही है कि हमारी हर प्रबल कामना साकार होती है।
एक पिता ने अपने चारो बेटो को बुलाकर एक एक लकड़ी दी और उसे तोड़कर दिखने को कहा। हर बेटे ने अपनी लकड़ी को आसानी से तोड़कर दिखा दिया। तब पिता ने चारो लकड़ियों को एक साथ बांधकर, हर बेटे को बारी बारी से उसे तोड़ने के लिए कहा। हर बेटे ने अपनी पूरी ताकत लगाकर कोशिश की, मगर एक साथ बंधी हुई चार लकड़ियों को कोई भी तोड़ नहीं पाया।
तब पिता ने बेटो को समझाया, ” इससे हमें सबक लेना चाहिए कि जब तुम अलग अलग रहोगे, तो कोई भी मुसीबत तुम्हे आसानी से तोड़ सकती है। लेकिन अगर तुम सभी भाई मिलकर रहोगे, हर चुनौती का सामना बेहतर तरीके से कर सकते हो।
गांव के बाहर बैठे साधु को पूरा गांव बहुत मानता था, क्योंकि साधु की खासियत थी कि वो ‘ रेन डांस ‘ यानि वर्षा नृत्य किया करता था । जब भी गांव में अकाल पड़ता, साधु मदमस्त होकर नाचता और वर्षा हो जाती। यह सिलसिला सालो से चला आ रहा था। साधु का नृत्य कभी असफल नहीं हुआ।
अब साधु वृद्ध हो गया था और अस्वस्थता के कारण उसने नृत्य करना छोड़ दिया था। एक बार गांव में भयानक अकाल पड़ा। सारे खेत पानी के आभाव में सुख गए। गांव वालो ने साधु से नाचने के लिए याचना की, लेकिन साधु ने अपने स्वास्थ्य की लाचारी बताकर इंकार कर दिया।
तब साधु के चलो ने ‘ रेन डांस ‘ करने का निश्चय किया। सभी चेले नाच नाच कर थक गए, लेकिन वर्षा नहीं हुई। चेलो ने साधु के पास आकर पूछा, “बाबा, आप जब भी नाचते हो, तब पानी जरूर बरसता है। हम इतना नाचे मगर बरसात नहीं हुई। ऐसा क्यों … ?
बाबा ने जवाब दिया, ” मेरे बच्चो, इसके पीछे दो कारण है। पहला तो यह है कि मैं जब भी नाचने के लिए खड़ा होता हु, तब मुझे विश्वास होता है कि मैं नाचूंगा तो बरसात जरूर होगी। दूसरा कारण यह है कि मैं तब तक नाचता हूँ, जब तक बरसात नहीं हो जाती …. ।”
इस बिज़नेस में जरुरी कार्यो को करते समय हमें विश्वास होना चाहिए की हम काम करेंगे, तो सफलता जरूर मिलेगी और हम तब तक काम करते रहेंगे, जब तक हम सफल नहीं हो जाते।
1825 में निकोलस प्रथम रूस के सिंहासन पर बैठे। उनके सिंहासन पर बैठते ही उनके ख़िलाफ़ विद्रोह होने लगा। यह विद्रोह उदारवादी कर रहे थे, जो आधुनिकीकरण की मांग कर रहे थे। वे चाहते थे कि रूस में यूरोप के बाक़ी देशो की तरह उद्योग धंधे और इमारतें बने। दिसंबर के विद्रोह के नाम से मशहूर इस विद्रोह का निर्ममता से दमन करते हुए निकोलस प्रथम ने विद्रोही नेता कोंदरेटी रयेलेयेव को मृत्युदंड देने का आदेश दिया। रयेलेयेव को फाँसी दी जाने के तख़्ते पर खड़ा किया गया और उसके गले में रस्सी बांध दी गई। फिर निचे से तख़्ता हटा लिया गया। लेकिन रयेलेयेव जैसे ही रस्सी से झूला, रस्सी टूट गई और वह जमींन पर गिर गया।
उस वक़्त इस तरह की घटनाएं ईश्वर का इंसाफ़ मानी जाती थीं और जो व्यक्ति मृत्युदंड से इस तरह बचता था, उसे आमतौर पर माफ़ कर दिया जाता था। जब रयेलेयेव अपने पैरो पर खड़ा हुआ, तो उसे चोट तो लगी थी, लेकिन उसे यकींन था कि उसकी जान बच गई है, इसलिए वह भीड़ से चिल्लाकर बोला, ” तुम लोगो ने देखा, रूस वाले कोई भी काम ठीक तरह से नही कर सकते। उन्हें तो रस्सी बनाना भी नहीं आती हैं !”
एक संदेशवाहक तत्काल यह ख़बर लेकर सम्राट के पास गया कि मृत्युदंड नहीं दिया जा सका। इस निराशाजनक ख़बर से चिंतित होने के बावज़ूद निकोलस प्रथम विद्रोही नेता रयेलेयेव के माफ़ी नामे पर हस्ताक्षर करने लगे। लेकिन तभी उन्होंने संदेशवाहक से पूछा, क्या इस घटना के बाद रयेलेयेव ने कुछ कहा था ?” संदेशवाहक ने जवाब दिया , ” उसने कहा था कि रूस वालो को तो रस्सी बनानी भी नहीं आती है।”
सम्राट ने माफ़ीनामे को फ़ाड़ते हुए कहा, ” अगर ऐसी बात है, तो हम उसकी बात को ग़लत साबित करके दिखा देंगे। ” अगले दिन रयेलेयेव को दोबारा फाँसी के फंदे पर लटकाया गया और इस बार रस्सी नहीं टूटी।
यह सबक सिख ले : एक बार बाहर निकल जाने के बाद आप शब्दों को दोबारा नहीं लौटा सकते। उन्हें नियंत्रण में रखे। व्यंग्य के प्रति ख़ास तौर पर सावधान रहें, आपके व्यंग्य बाणो से आपको क्षणिक संतुष्टि तो मिल सकती है, लेकिन बदले में आपको उनकी बहुत ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है।
सर क्रिस्टोफ़र रेन इंग्लैंड के पुनर्जागरण काल में इस बात के जीते जागते उदाहरण थे। उन्होंने गणित, खगोल शास्त्र, भौतिक शास्त्र और जिव विज्ञानं में महारत हासिल कर ली थी। वे इंग्लैंड के सबसे मशहूर वास्तुविद थे। इस क्षेत्र में उनके लम्बे कैरियर में उनके ग्राहकों ने उन्हें डिज़ाइन बदलने के बारे में बहुत से अव्यवहारिक सुझाव दिए। उन्होंने कभी ग्राहकों से बहस नहीं की या चुभने वाले शब्द नहीं कहे। उनके पास अपनी बात साबित करने के दूसरे तरीक़े थे।
1688 में रेन ने वेस्टमिंस्टर शहर के लिए एक शानदार टाउन हॉल डिज़ाइन किया, लेकिन मेयर उससे संतुष्ट नहीं था। उसने रेन से कहा कि दूसरी मंजिल सुरक्षित नहीं हैं और यह पहली मंजिल पर बने उसके ऑफिस पर कभी भी गिर सकती है। उसने रेन से कहा कि वह अतिरिक्त सहारे के लिए पत्थर के दो खंभे और लगा दे। रेन बहुत ही कुशल इंजीनियर थे। वे अच्छी तरह जानते थे कि खंभे लगाने का कोई मतलब नहीं है और मेयर का डर निराधार था। लेकिन उन्होंने खंभे लगा दिए, जिससे मेयर बहुत खुश हो गया। कुछ साल बाद जब कुछ मजदूर साफ़ सफाई करने के लिए ऊँची नसेनी पर चढ़े, तब जाकर पता चला कि खंभे सहारा नहीं दे रहे थे, बल्कि उससे थोड़ी दूर पर ही ख़त्म हो गए थे।
खंभे सिर्फ दिखने के लिए लगाए गए थे। लेकिन इससे दोनों ही लोगो को वह मिल गया, जो वे चाहते थे। मेयर को तसल्ली हो गई और रेन जानते थे कि भावी पीढिंया समझ लेगी कि उनकी मूल डिज़ाइन सही थी और खंभों की जरुरत नहीं थी।
काम के माध्यम से अपने विचार प्रकट करने से आपके विरोधी रक्षात्मक नहीं होते है, इसलिए वे आसानी से आपकी बात मान जाते है। बहस के बजाय कार्य से शाब्दिक और भौतिक दोनों रूपों में अपनी बात मनवाना ज्यादा कारगर होता हैं।
प्राचीन चीन में चेंग के ड्यूक वू ने यह फैसला किया कि वह सशक्त बन रहे हु राज्य पर कब्ज़ा कर लेगा। उसने अपनी योजना किसी को भी नहीं बताई और हू के राजा से अपनी बेटी की शादी कर दी।
फिर उसने एक सभा बुलाई और अपने मंत्रियो से पूछा, ” मैं किसी देश पर आक्रमण करने के बारे में सोच रहा हूँ। हमें किस देश पर हमला करना चाहिए ?” जैसी उसे उम्मीद थी, एक मंत्री ने जवाब दिया, ” हमें हु राज्य पर हमला करना चाहिए। ” ड्यूक गुस्सा दिखाते हुए बोला, ” हु अब हमारा मित्र राज्य है। तुम उस पर हमला करने का सुझाव कैसे दे सकते हो ?”
इस गलत बात के लिए उसने मंत्री का सिर कलम करवा दिया। हु के राजा ने इस बारे में सुना। उसने सोचा कि उसके पास वू की ईमानदारी के बहुत से सबुत भी तो है। इसके अलावा वू ने उसके साथ अपनी पुत्री की शादी भी की है। इसलिए उसने वू से खुद को बचने के लिए कोई सावधानी नहीं बरती। कुछ सप्ताह बाद वू की सेनाएँ हू राज्य में घुस गई और उन्होंने पुरे देश पर कब्ज़ा कर लिया।
